मुंबई की एक निजी कंपनी के साथ करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जहां ठगों ने कंपनी के सीईओ बनकर WhatsApp पर संदेश भेजे और कर्मचारियों को फर्जी निर्देश देकर 10.40 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। यह ठगी 3 जून से 15 जून के बीच 63 ट्रांजेक्शन में की गई।

जांच के दौरान इस पूरे मामले की कड़ियां दिल्ली तक पहुंचीं। जसोला स्थित एक बैंक शाखा में कुछ संदिग्ध लेनदेन दिखने के बाद बैंक मैनेजर ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की और एक बड़े साइबर नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें विकास (22), वंश (21), फैयाज आलम (22), अमित (28) और बलवीर कुमार (23) शामिल हैं। सभी आरोपी दिल्ली के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, इनका काम ठगी की रकम को बैंक खातों से निकालकर आगे नेटवर्क तक पहुंचाना था।
जांच में सामने आया है कि साइबर फ्रॉड केवल एक व्यक्ति का काम नहीं होता, बल्कि इसमें पूरी चेन सक्रिय रहती है। कोई फर्जी पहचान बनाता है, कोई बैंक खाते उपलब्ध कराता है, कोई रकम ट्रांसफर कराता है और कुछ लोग उसे निकालकर सुरक्षित जगह पहुंचाते हैं।
दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि समय रहते कार्रवाई कर करीब 9 लाख रुपये की संदिग्ध निकासी भी रोक ली गई। अब पुलिस 10 करोड़ से ज्यादा की फाइनेंशियल ट्रेल खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।

इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराध अब राज्य या शहर की सीमाओं तक सीमित नहीं रहे। एक मैसेज, एक भरोसा और कुछ ही मिनटों में करोड़ों रुपये साफ हो सकते हैं। पुलिस ने कंपनियों और आम लोगों से अपील की है कि किसी भी बड़े वित्तीय निर्देश की दोबारा पुष्टि जरूर करें, चाहे संदेश कितना भी असली क्यों न लगे।


