दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए रिंग रोड एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पहला चरण पूरा हो चुका है, जिससे आने वाले समय में राजधानी की यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

जानकारी के अनुसार, करीब 66 साल पहले बनी रिंग रोड पर अब ट्रैफिक का दबाव चार गुना से अधिक बढ़ चुका है। पहले यह सड़क रोजाना लगभग 1 से 1.10 लाख वाहनों के लिए डिजाइन की गई थी, लेकिन वर्तमान में यहां वाहनों की संख्या कई गुना ज्यादा हो चुकी है।

इसी समस्या को देखते हुए रिंग रोड के ऊपर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना के तहत पूरी रिंग रोड को छह अलग-अलग हिस्सों (स्ट्रेच) में बांटकर सर्वे किया जा रहा है।

पहले चरण में मजनूं का टीला से चंदगीराम अखाड़ा और यमुना बाजार तक करीब 2.5 किलोमीटर हिस्से का सर्वे पूरा हो चुका है और इसकी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। वहीं, दूसरे चरण में आईटीओ, राजघाट और सराय काले खां जैसे व्यस्त इलाकों को शामिल किया गया है, जहां निर्माण से जुड़ी चुनौतियों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा जारी है।
इसके अलावा यमुना बाजार हनुमान मंदिर से डीएनडी फ्लाईओवर तक करीब 11.5 किलोमीटर लंबे हिस्से का सर्वे भी चल रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट का उद्देश्य ट्रैफिक जाम को कम करना और लोगों के सफर को तेज व सुगम बनाना है।
अधिकारियों का मानना है कि एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम होगा और राजधानी में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी।