सिंह और धनु राशि पर जारी है शनि ढैय्या का प्रभाव, जानें कब मिलेगी राहत और क्या हैं उपाय

Religious June 10, 2026 By Santosh Pandit
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वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह को कर्मफलदाता और न्याय का प्रतीक माना जाता है। शनि की चाल अन्य ग्रहों की तुलना में काफी धीमी होती है, जिसके कारण इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। वर्तमान में शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं और वर्ष 2026 में भी इसी राशि में स्थित रहेंगे। इस गोचर का असर विशेष रूप से सिंह और धनु राशि के जातकों पर पड़ रहा है, जो इस समय शनि ढैय्या के प्रभाव में हैं।

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ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, सिंह और धनु राशि पर शनि ढैय्या की शुरुआत 29 मार्च 2025 से हुई थी। यह प्रभाव 3 जून 2027 तक बना रहेगा, जिसके बाद कुछ समय के लिए राहत मिलेगी। हालांकि शनि की वक्री और मार्गी चाल के कारण 20 अक्टूबर 2027 से 23 फरवरी 2028 तक इसका प्रभाव पुनः देखने को मिलेगा। इसके बाद ही इन राशियों पर शनि ढैय्या का पूर्ण रूप से समापन माना जाएगा।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ढैय्या के दौरान व्यक्ति को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में रुकावटें, आर्थिक अस्थिरता, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और पारिवारिक या सामाजिक रिश्तों में तनाव जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। हालांकि विद्वानों का मानना है कि यह समय व्यक्ति को धैर्य, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ जीवन जीने की सीख भी देता है।

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शनि के प्रभाव को संतुलित करने के लिए ज्योतिष में कई उपाय बताए गए हैं। शनिवार के दिन या प्रतिदिन "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही शनि चालीसा का नियमित पाठ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने में सहायक माना जाता है।

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शनिवार के दिन काला तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल या काले वस्त्र का दान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि ऐसे दान-पुण्य से शनि के अशुभ प्रभावों में कमी आती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

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हनुमान जी की आराधना को भी शनि पीड़ा से राहत का प्रभावी उपाय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी की कृपा से शनि देव प्रसन्न होते हैं। इसलिए मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना लाभकारी माना जाता है।

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इसके अतिरिक्त शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और उसकी परिक्रमा करना भी शुभ माना जाता है। वहीं भगवान शिव की पूजा-अर्चना और शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भी शनि के प्रभाव को संतुलित करने में सहायता मिलती है।

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ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पशु-पक्षियों को भोजन कराना और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी शनि को प्रसन्न करने का एक महत्वपूर्ण उपाय है। विशेष रूप से कौवों, कुत्तों तथा अन्य जीवों को भोजन कराने और गरीबों व बुजुर्गों की सेवा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।

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हालांकि ज्योतिषीय मान्यताएं आस्था और विश्वास पर आधारित होती हैं। ऐसे में किसी भी निर्णय को लेते समय व्यावहारिक सोच और विशेषज्ञ सलाह को भी महत्व देना आवश्यक है।

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