राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोटा और बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा से सामने आए मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। दोनों जिलों में कुछ ही दिनों के भीतर कई प्रसूताओं की मौत के बाद पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल स्थित मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में पिछले छह दिनों के दौरान पांच महिलाओं की प्रसव के बाद मौत हो गई। सभी महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। ऑपरेशन के बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। परिजनों ने कई मामलों में इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में सिजेरियन ऑपरेशन किए जा रहे हैं, जबकि उपलब्ध संसाधन सीमित बताए जा रहे हैं। इसी बीच ऑपरेशन थिएटर की एक कल्चर रिपोर्ट में तकनीकी खामी सामने आने के बाद संक्रमण की आशंका भी जताई गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि शुरुआती जांच में मौतों का कारण संक्रमण नहीं, बल्कि चिकित्सकीय जटिलताएं प्रतीत हो रही हैं। एहतियात के तौर पर संबंधित ऑपरेशन थिएटर को बंद कर उसकी स्टरलाइजेशन और फ्यूमिगेशन की प्रक्रिया कराई जा रही है।
उधर, बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में भी चार दिनों के भीतर एक नाबालिग सहित चार प्रसूताओं की मौत दर्ज की गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ मामलों में गंभीर एनीमिया और एक मामले में उच्च रक्तचाप को मौत का संभावित कारण माना जा रहा है। इन मामलों की भी विस्तृत जांच की जा रही है।

घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जयपुर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की दो सदस्यीय टीम भीलवाड़ा भेजी है। टीम सभी मामलों की मेडिकल हिस्ट्री, उपचार प्रक्रिया और अस्पताल की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा करेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले कोटा और बीकानेर के सरकारी अस्पतालों में भी प्रसूताओं की मौत और सिजेरियन के बाद स्वास्थ्य संबंधी गंभीर मामलों ने प्रदेश की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ाई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।



