अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान जांच की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर विशेष जोर दिया। अदालत ने सुझाव दिया कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) का पुनर्गठन कर उसकी कमान किसी अनुभवी वरिष्ठ IPS अधिकारी को सौंपी जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और जांच का उद्देश्य केवल सच्चाई तक पहुंचना होना चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने जांच की प्रगति की समीक्षा की। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार की ओर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि जांच अभी जारी है। उन्होंने कहा कि जांच प्रभावित न हो, इसलिए फिलहाल अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
सुनवाई के दौरान जब अदालत ने SIT की संरचना के बारे में पूछा, तो बताया गया कि टीम में दो IAS अधिकारी और एक IG रैंक के अधिकारी शामिल हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतने संवेदनशील मामले की जांच किसी अनुभवी वरिष्ठ IPS अधिकारी के नेतृत्व में होना अधिक उपयुक्त होगा। अदालत ने सरकार से ऐसे अधिकारियों के नामों पर विचार कर अगली सुनवाई में प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि न्यायालय किसी भी तरह के राजनीतिक विवाद से दूर रहकर केवल निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि अदालत की प्राथमिकता यह है कि मामले की सच्चाई सामने आए और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़े।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है। तब तक राज्य सरकार से SIT के पुनर्गठन पर आवश्यक निर्देश लेने और जांच की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। अब अगली सुनवाई में जांच की दिशा और SIT की नई संरचना पर महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है।



