नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी जांच शुरू हो गई है, जिसने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने 5 सदस्यीय न्यायिक पैनल गठित किया है, जो 2006 से 2025-26 तक सार्वजनिक पदों पर रहे नेताओं और अधिकारियों की संपत्ति की जांच करेगा।

इस जांच के दायरे में देश के 7 पूर्व प्रधानमंत्री शामिल हैं, जिनमें Pushpa Kamal Dahal, KP Sharma Oli, Sher Bahadur Deuba, Baburam Bhattarai समेत अन्य नेता शामिल हैं।

👑 राजा और राष्ट्रपति भी जांच के घेरे में

यह कार्रवाई सिर्फ राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। पूर्व राजा Gyanendra Shah भी जांच के दायरे में हैं।
इसके अलावा तीन राष्ट्रपतियों—Ram Baran Yadav, Bidya Devi Bhandari और Ram Chandra Poudel—की संपत्तियों की भी जांच होगी।
सरकार ने साफ किया है कि जांच निष्पक्ष होगी और इसमें सत्ता, विपक्ष, पूर्व राजशाही—सभी को शामिल किया जाएगा।
📊 100 से ज्यादा मंत्री-अधिकारी भी दायरे में
इस जांच में 100 से अधिक मंत्री, संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारी और वरिष्ठ नौकरशाह भी शामिल होंगे।
खास बात यह है कि जांच सिर्फ जीवित नेताओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मृत नेताओं की संपत्ति और उनके परिवारों की संपत्ति की भी जांच की जा सकती है।
⚖️ रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में आयोग
इस 5 सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज Rajendra Kumar Bhandari कर रहे हैं।
यह पैनल हाल ही में हुए चुनावों के बाद गठित किया गया है, जिसमें बालेन शाह की पार्टी को भारी बहुमत मिला था।
🔍 क्यों खास है यह जांच?
नेपाल में 2006 के जनआंदोलन के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था शुरू हुई थी, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आते रहे।
पहले जांच अक्सर सीमित दायरे में होती थी, लेकिन इस बार पहली बार सत्ता, विपक्ष और पूर्व राजशाही—सभी को एक साथ जांच के दायरे में लाया गया है।
💡 आगे क्या?
सरकार का दावा है कि जांच पूरी तरह सबूत और कानून के आधार पर की जाएगी। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से नेपाल की राजनीति में बड़े खुलासे हो सकते हैं और आने वाले समय में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।