स्वदेशी ‘भार्गवास्त्र’ से मजबूत होगी भारतीय सेना की ड्रोन सुरक्षा, अंतिम परीक्षण चरण में पहुंचा सिस्टम

Technology May 19, 2026 By Praveen Sharma
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भारतीय सेना की एंटी-ड्रोन क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में देश को बड़ी सफलता मिली है। देश की निजी रक्षा कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित स्वदेशी काउंटर-ड्रोन सिस्टम ‘भार्गवास्त्र’ अब अपने अंतिम परीक्षण चरण में पहुंच चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर 2026 तक इसके सभी परीक्षण पूरे कर लिए जाएंगे। यह अत्याधुनिक सिस्टम दुश्मन के ड्रोन, लॉइटरिंग म्यूनिशन और विशेष रूप से स्वार्म अटैक जैसे खतरों को नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है।

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भार्गवास्त्र एक लेयर्ड हार्ड-किल इंटरसेप्शन तकनीक पर आधारित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक लॉन्चर में 64 माइक्रो रॉकेट या मिसाइलें लगाई जा सकती हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें मात्र 10 सेकंड के भीतर दागा जा सकता है। यही वजह है कि यह सिस्टम ड्रोन स्वार्म हमलों के खिलाफ बेहद प्रभावी माना जा रहा है। सिस्टम मध्यम और बड़े यूएवी को लगभग 10 किलोमीटर दूरी से तथा छोटे ड्रोन को 6 किलोमीटर से अधिक दूरी पर पहचानने में सक्षम है।

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इस सिस्टम में दो तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया गया है। स्वार्म अटैक को रोकने के लिए अनगाइडेड माइक्रो रॉकेट लगाए गए हैं, जो बड़े इलाके को कवर कर सकते हैं। वहीं सटीक निशाना लगाने के लिए गाइडेड माइक्रो मिसाइलें मौजूद हैं, जो लक्ष्य को सीधे नष्ट करने की क्षमता रखती हैं। भार्गवास्त्र को C4I नेटवर्क और आधुनिक EO/IR सेंसर से जोड़ा गया है, जिससे यह दिन और रात के साथ हर मौसम में काम कर सकता है।

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भार्गवास्त्र को भारत की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह रेगिस्तान, मैदानी इलाकों और 5000 मीटर तक की ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में भी प्रभावी तरीके से काम कर सकता है। ऐसे में यह सीमाओं, सैन्य ठिकानों और रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

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आधुनिक युद्ध में ड्रोन और स्वार्म अटैक तेजी से बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भार्गवास्त्र जैसे सिस्टम महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्रों के चारों ओर मजबूत सुरक्षा कवच तैयार कर सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यदि संवेदनशील क्षेत्रों में 4 से 6 भार्गवास्त्र सिस्टम तैनात किए जाएं तो दुश्मन के सैचुरेशन अटैक को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित यह सिस्टम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है। सफल परीक्षणों के बाद इसके जल्द भारतीय सेना में शामिल होने की संभावना है, जिससे देश की रक्षा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

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