अफ्रीका के कई देशों में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। सबसे ज्यादा मामले कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में सामने आए हैं, जहां अब तक 900 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं।
WHO के अनुसार, कांगो के इतुरी प्रांत के कई इलाकों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। कुछ उपचार केंद्रों पर हमले और आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे राहत और इलाज का काम प्रभावित हुआ है। स्थानीय स्तर पर विरोध और अफवाहें भी महामारी को नियंत्रित करने की कोशिशों को मुश्किल बना रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इबोला एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। इसके शुरुआती लक्षण तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द जैसे होते हैं। गंभीर स्थिति में शरीर से खून बहना, सांस लेने में दिक्कत और अंगों के फेल होने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि फिलहाल इस वायरस के कुछ स्ट्रेन के लिए सीमित उपचार उपलब्ध हैं, लेकिन संक्रमण को रोकने के लिए जागरूकता, आइसोलेशन और सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी हैं। WHO और स्थानीय प्रशासन लगातार निगरानी और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

भारत ने भी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए अफ्रीकी देशों को मेडिकल सप्लाई और सुरक्षा उपकरण भेजे हैं। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बताया कि भारत अफ्रीका के समर्थन के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय ने नागरिकों को कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सावधानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से महामारी के खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है।


