राष्ट्रपति भवन में वीरता का सम्मान: देश के जांबाज सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों को मिले Gallantry Awards

Success Story June 9, 2026 By Bharat Bhushan Malviya
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देश की रक्षा और सुरक्षा के लिए अदम्य साहस, सर्वोच्च बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले वीर सैनिकों एवं सुरक्षाकर्मियों को राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। भारत की राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सशस्त्र बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस सेवाओं से जुड़े बहादुर जवानों को उनके असाधारण पराक्रम के लिए अलंकृत किया।

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इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कुल 7 कीर्ति चक्र, 15 वीर चक्र और 29 शौर्य चक्र प्रदान किए। इनमें से 2 कीर्ति चक्र, 3 वीर चक्र और 1 शौर्य चक्र मरणोपरांत प्रदान किए गए। ये सम्मान उन वीर जवानों को दिए गए जिन्होंने अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना राष्ट्र की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए अद्वितीय साहस का परिचय दिया।

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समारोह के दौरान शांति काल के दूसरे सर्वोच्च वीरता सम्मान ‘कीर्ति चक्र’ और युद्धकालीन वीरता पुरस्कार ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किए गए जवानों की वीर गाथाओं ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। मरणोपरांत सम्मान प्राप्त करने वाले शहीदों के परिजनों ने जब राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार ग्रहण किए, तो पूरा सभागार गर्व और सम्मान से गूंज उठा।

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सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और कठिन सैन्य ऑपरेशनों में असाधारण बहादुरी दिखाने वाले 15 वीर जवानों को ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया गया। इनमें से तीन सैनिकों को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया गया। इन वीरों ने दुश्मनों और आतंकवादियों के खिलाफ अभियानों में साहस और नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया था।

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इसके अतिरिक्त 29 सुरक्षाकर्मियों को ‘शौर्य चक्र’ से नवाजा गया। यह सम्मान शांति काल में असाधारण वीरता और आत्मबलिदान के लिए दिया जाता है। इस वर्ष एक शौर्य चक्र मरणोपरांत प्रदान किया गया।

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सम्मानित होने वालों में भारतीय सेना के जवानों के साथ-साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), आतंकवाद निरोधक दस्तों और विभिन्न राज्य पुलिस बलों के अधिकारी एवं जवान शामिल रहे। इन वीर सुरक्षाकर्मियों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों, पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद के खिलाफ कार्रवाई तथा देश के विभिन्न हिस्सों में नक्सल विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

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यह समारोह न केवल वीरता और बलिदान का सम्मान था, बल्कि उन सभी सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक भी था, जो दिन-रात देश की सुरक्षा के लिए समर्पित रहते हैं।

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