दिल्ली में पानी की चोरी, बिना बिल के जल आपूर्ति और पुराने उपभोक्ता रिकॉर्ड की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है। सरकार का दावा है कि राजधानी में करीब 30 लाख ऐसे घर हैं, जहां दिल्ली जल बोर्ड का पानी तो पहुंच रहा है, लेकिन वे नियमित बिलिंग व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं। अब इन सभी उपभोक्ताओं का ई-केवाईसी (e-KYC) कर उन्हें आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा.
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि राजधानी में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 60 लाख से अधिक है, जबकि जल बोर्ड के पंजीकृत उपभोक्ता लगभग 30 लाख ही हैं। इस अंतर को देखते हुए सरकार ने व्यापक सत्यापन अभियान चलाने का निर्णय लिया है, ताकि बिना पंजीकरण वाले कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें नियमित किया जा सके और जल चोरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके.

अभियान के तहत तीन निजी एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो अगले छह महीनों तक घर-घर जाकर उपभोक्ताओं का सत्यापन करेंगी। इस दौरान ई-केवाईसी, मीटर रीडिंग, उपभोक्ता विवरण अपडेट करने और समय पर बिल उपलब्ध कराने का काम किया जाएगा। एजेंसियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर भुगतान किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे.
सरकार का कहना है कि इस अभियान के जरिए जल बोर्ड का डेटाबेस भी पूरी तरह अपडेट होगा। पुराने या गलत रिकॉर्ड हटाकर वास्तविक उपभोक्ताओं का विवरण दर्ज किया जाएगा। साथ ही कई स्थानों पर जियो-टैगिंग और आधुनिक मीटरिंग व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे पानी की आपूर्ति और खपत की सटीक निगरानी संभव हो सकेगी तथा गलत बिलिंग की शिकायतों में कमी आएगी.

जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया है। विभिन्न इलाकों में नई सीवर लाइनें बिछाने, सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने और जल प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक बनाने की योजनाओं पर काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से भविष्य में पानी की उपलब्धता बेहतर होगी और यमुना प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी.
सरकार के अनुसार, इस पूरे अभियान का उद्देश्य केवल अवैध कनेक्शनों की पहचान करना नहीं है, बल्कि हर उपभोक्ता को नियमित बिलिंग प्रणाली से जोड़कर जल बोर्ड के राजस्व में सुधार करना, पानी की चोरी रोकना और राजधानी में जल वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाना भी है.

