दिल्ली के पालम इलाके में 18 मार्च को हुए भीषण अग्निकांड की मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट ने कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है। इस हादसे में नौ लोगों की जान चली गई थी, जबकि तीन अन्य घायल हुए थे। जांच में प्राथमिक तौर पर इमारत के मुख्य एमसीबी (MCB) बॉक्स के पास हुए शॉर्ट सर्किट को आग लगने की सबसे संभावित वजह बताया गया है। साथ ही नगर निगम (MCD) और दिल्ली फायर सर्विस की कार्यप्रणाली में गंभीर कमियां भी सामने आई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इमारत के भीतर बड़ी मात्रा में ज्वलनशील कॉस्मेटिक सामान रखा हुआ था, जिससे आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया। जांच में यह भी पाया गया कि भवन में अग्नि सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया गया था और कई नियामकीय नियमों का उल्लंघन हुआ था।

मजिस्ट्रियल जांच में बचाव अभियान के दौरान सामने आई तकनीकी और प्रशासनिक कमियों का भी उल्लेख किया गया है। आग बुझाने और ऊंची इमारतों से लोगों को निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाला ब्रोंटो स्काईलिफ्ट समय पर मौके पर पहुंच गया था, लेकिन ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों में फंसने के कारण उसका संचालन प्रभावित हो गया। जांच में कहा गया कि उस समय वैकल्पिक हाई-राइज रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध नहीं थे, जिससे राहत कार्य में देरी हुई और स्थिति और गंभीर हो गई।
रिपोर्ट में कानूनी जांच से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच में शामिल सहायक विद्युत निरीक्षक की तकनीकी दक्षता और प्रशिक्षण को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व में जिन आग की घटनाओं की उन्होंने जांच की थी, उनमें भी आग लगने के वास्तविक कारणों का स्पष्ट निर्धारण नहीं हो सका था।
दिल्ली सरकार ने रिपोर्ट मिलने के बाद संकेत दिए हैं कि सामने आई कमियों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फायर सर्विस को मजबूत बनाने, अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति, आधुनिक उपकरणों की खरीद और मौजूदा संसाधनों की नियमित तकनीकी जांच पर भी जोर दिया जा रहा है। वहीं, मालवीय नगर में हुई एक अन्य आग की घटना की मजिस्ट्रियल जांच भी अंतिम चरण में है और उसकी रिपोर्ट जल्द सरकार को सौंपी जा सकती


