भारत में कोल्ड ड्रिंक बाजार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इस बीच कोका-कोला ने स्वीकार किया है कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान उसकी बाजार हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का कहना है कि बढ़ती पैकेजिंग लागत के साथ-साथ ₹11 से ₹40 के लोकप्रिय प्राइस सेगमेंट में उपयुक्त उत्पादों की कमी उसके लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) जॉन मर्फी ने एक इंटरव्यू में बताया कि भारतीय बाजार में बड़ी संख्या में ग्राहक ब्रांड से ज्यादा अपने बजट के आधार पर खरीदारी करते हैं। ऐसे में ₹11 से ₹40 की कीमत वाले उत्पादों की मजबूत मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने माना कि इस मूल्य वर्ग में कंपनी का मौजूदा पोर्टफोलियो पर्याप्त नहीं है, जिससे बाजार हिस्सेदारी पर असर पड़ा है।
मर्फी ने कहा कि कंपनी इस कमी को दूर करने की दिशा में काम कर रही है और आने वाले समय में नई पैकेजिंग तथा बेहतर प्राइसिंग रणनीति के जरिए खोई हुई हिस्सेदारी वापस हासिल करने का प्रयास करेगी।
बढ़ती लागत से बढ़ा दबाव

कोका-कोला के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में कच्चे माल की बढ़ती कीमतें शामिल हैं। इस वर्ष एल्युमीनियम और PET प्लास्टिक की लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिससे उत्पादन खर्च बढ़ गया। इसका असर कंपनी की पैकेजिंग लागत पर पड़ा और कई उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी करनी पड़ी।
कंपनी ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण एल्युमीनियम कैन की आपूर्ति प्रभावित हुई। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े व्यवधानों के चलते सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा। हालांकि, कमी को पूरा करने के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से एल्युमीनियम कैन का आयात किया जा रहा है।

भारत बना रणनीतिक बाजार
हालिया चुनौतियों के बावजूद कोका-कोला भारत को अपने सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक मानती है। कंपनी ने वैश्विक स्तर पर बेहतर तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया है और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों से जुड़े मार्केटिंग अभियानों के चलते अपने वार्षिक कारोबारी अनुमान भी बढ़ाए हैं।
कंपनी का मानना है कि यदि वह भारतीय उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता को ध्यान में रखते हुए ₹11-40 के प्राइस सेगमेंट में अधिक विकल्प उपलब्ध कराती है और पैकेजिंग रणनीति को मजबूत बनाती है, तो आने वाले समय में बाजार में अपनी स्थिति फिर से मजबूत करने में सफल हो सकती है।

