ईरान ने अपने कई भूमिगत मिसाइल ठिकानों को दोबारा सक्रिय करने की दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया है। हालिया सैटेलाइट तस्वीरों और विश्लेषणों से संकेत मिले हैं कि संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हुए कई टनल प्रवेश द्वार और सैन्य पहुंच मार्ग अब फिर से उपयोग के लिए तैयार किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल द्वारा पहले जिन भूमिगत सुविधाओं को निशाना बनाया गया था, उनमें से बड़ी संख्या में टनल प्रवेश द्वार फिर से खोले जा चुके हैं। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और भारी वाहनों की आवाजाही के लिए आवश्यक ढांचे को भी बहाल किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल टनल के प्रवेश मार्गों को अवरुद्ध कर देने से किसी देश की मिसाइल क्षमता को स्थायी रूप से समाप्त नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि मिसाइल स्टॉक, लॉन्चर और प्रशिक्षित कर्मी सुरक्षित बने रहें, तो सैन्य क्षमताओं को अपेक्षाकृत कम समय में फिर से सक्रिय किया जा सकता है।

ईरान लंबे समय से अपने मिसाइल कार्यक्रम को भूमिगत बंकरों और सुरंगों के माध्यम से सुरक्षित रखने की रणनीति अपनाता रहा है। इन संरचनाओं का उद्देश्य बाहरी हमलों से रक्षा करना और सैन्य संसाधनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि संघर्ष के दौरान ईरान की मिसाइल गतिविधियों की गति प्रभावित हुई थी, लेकिन पूरी तरह बंद नहीं हुई। युद्धविराम के बाद मरम्मत और पुनर्सक्रियण कार्यों में तेजी आने से उसकी सैन्य तैयारियों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि आधुनिक युद्ध केवल उन्नत हथियारों की क्षमता से तय नहीं होता, बल्कि लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग क्षमता और दीर्घकालिक रणनीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ईरान द्वारा सीमित संसाधनों के बावजूद क्षतिग्रस्त ढांचे को तेजी से पुनर्स्थापित करना इसी का उदाहरण माना जा रहा है।

इस बीच, क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल सैन्य कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए व्यापक राजनीतिक और राजनयिक समाधान की आवश्यकता होगी।

ईरान की बढ़ती सैन्य तैयारियों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर दुनिया भर की नजर बनी हुई है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि चल रही वार्ताएं तनाव कम करने में कितनी सफल होती हैं और क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
