दुनियाभर में आर्थिक सुस्ती और बढ़ती छंटनी का असर अब भारत के रियल एस्टेट बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। खासकर बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और गुरुग्राम जैसे आईटी हब शहरों में लोग घर खरीदने के फैसले टाल रहे हैं। नौकरी की अनिश्चितता के कारण मिडिल क्लास परिवार बड़े होम लोन और भारी ईएमआई लेने से बच रहे हैं।

आईटी सेक्टर में लगातार हो रही छंटनी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव ने कर्मचारियों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है। कई बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी कटौती की खबरों के बाद लोग “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपना रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई प्रोफेशनल्स ने माना है कि वित्तीय क्षमता होने के बावजूद वे इस समय घर खरीदने का जोखिम नहीं लेना चाहते।
रियल एस्टेट रिपोर्ट्स के अनुसार, आईटी शहरों में बिना बिके घरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बेंगलुरु में अनसोल्ड इन्वेंट्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि पुणे जैसे शहरों में भी नए घरों की बिक्री धीमी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले आईटी प्रोफेशनल्स मिड और लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट के सबसे बड़े खरीदार थे, लेकिन अब मांग में कमी साफ दिखाई दे रही है।
इसके साथ ही किराए के बाजार में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले आईटी इलाकों में किराया तेजी से बढ़ रहा था, अब कई मकान मालिक किराए में छूट देने और कम सिक्योरिटी डिपॉजिट पर घर देने को तैयार हैं। लोग लंबी अवधि के लोन की बजाय फिलहाल किराए पर रहना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञ इसे रियल एस्टेट मार्केट का क्रैश नहीं, बल्कि अस्थायी मंदी बता रहे हैं। उनका मानना है कि भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) और विदेशी कंपनियों के बढ़ते निवेश से आने वाले समय में बाजार को फिर से मजबूती मिल सकती है।



